Satmi ke Bachche

(0 Customer Reviews)

₹240

₹299 20% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 72
  • Language: HINDI

"सतमी के बच्चे" महापंडित Rahul Sankrityayan की एक महत्वपूर्ण कृति है, जो भारतीय समाज के वंचित, उपेक्षित और शोषित वर्ग के जीवन का संवेदनशील एवं यथार्थपरक चित्र प्रस्तुत करती है। यह उपन्यास केवल कुछ बच्चों की कहानी नहीं है, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था का दस्तावेज़ है जिसमें गरीबी, असमानता, अभाव और शोषण पीढ़ी-दर-पीढ़ी मनुष्य के जीवन को प्रभावित करते रहते हैं।

राहुल सांकृत्यायन ने इस कृति में निम्नवर्गीय बच्चों के जीवन-संघर्ष, उनकी मासूम इच्छाओं, टूटते सपनों और कठोर सामाजिक यथार्थ को अत्यंत मार्मिकता के साथ अभिव्यक्त किया है। उपन्यास के पात्र समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसकी आवाज़ अक्सर मुख्यधारा के साहित्य और सामाजिक विमर्श में अनसुनी रह जाती है। लेखक उनकी पीड़ा का केवल वर्णन नहीं करते, बल्कि उन सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों की भी पड़ताल करते हैं जो इस विषमता को जन्म देते हैं।

इस रचना की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी दृष्टिकोण है। राहुल सांकृत्यायन जीवन की कठिन परिस्थितियों को किसी रोमानी आवरण में नहीं छिपाते, बल्कि उन्हें उनकी वास्तविकता में प्रस्तुत करते हैं। बच्चों की आँखों से देखा गया संसार पाठक को समाज की कठोर सच्चाइयों से परिचित कराता है और उसे आत्ममंथन के लिए विवश करता है। उपन्यास में करुणा है, लेकिन वह दया नहीं बनती; संघर्ष है, लेकिन वह निराशा में नहीं बदलता। यही इसकी साहित्यिक शक्ति है।

भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और जनजीवन के निकट है। लेखक की वैचारिक प्रतिबद्धता और मानवीय दृष्टि कथा को केवल मनोरंजक नहीं रहने देती, बल्कि उसे सामाजिक चेतना और परिवर्तन का माध्यम बना देती है। इस दृष्टि से "सतमी के बच्चे" हिंदी के प्रगतिशील साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है।

यह उपन्यास आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने प्रकाशन काल में था, क्योंकि सामाजिक असमानता, बाल-अधिकार, शिक्षा और अवसरों की विषमता जैसे प्रश्न आज भी हमारे समाज के सामने मौजूद हैं। "सतमी के बच्चे" पाठक को केवल एक कथा नहीं देता, बल्कि उसे समाज के उन चेहरों से परिचित कराता है जिन्हें देखने और समझने की आवश्यकता आज भी बनी हुई है।

Related Products

KHADANER CHUPKOTHA BY PALASH PODDAR
  • 20% OFF
Apsara By Suryakant Tripathi Nirala
  • 10% OFF
Alka By Suryakant Tripathi Nirala
  • 10% OFF
Kapalkundala (Hindi)
  • 20% OFF

Kapalkundala (Hindi)

  • ₹240
  • ₹299
KAB TAK PUKARUN
  • 20% OFF

KAB TAK PUKARUN

  • ₹240
  • ₹299
Karmbhumi
  • 20% OFF

Karmbhumi

  • ₹240
  • ₹299
GANGA RATAN BIDESHI
  • 10% OFF

GANGA RATAN BIDESHI

  • ₹252
  • ₹280
GABAN
  • 20% OFF

GABAN

  • ₹240
  • ₹299
🛒 Your Shopping Cart