Vayam Rakshamah

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₹299 20% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 504
  • Language: HINDI

'वयं रक्षामः' हिंदी साहित्य के महान उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन शास्त्री का सर्वाधिक चर्चित और बहुचर्चित ऐतिहासिक-मिथकीय उपन्यास है। यह रामकथा पर आधारित होते हुए भी पारंपरिक दृष्टिकोण से भिन्न एक नवीन और साहसिक व्याख्या प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास का नायक राम नहीं, बल्कि रावण है। लेखक ने रावण के व्यक्तित्व, उसकी राजनीतिक दृष्टि, सांस्कृतिक चिंतन, साम्राज्य-निर्माण की महत्वाकांक्षा तथा उसके उत्थान-पतन को एक नए परिप्रेक्ष्य में चित्रित किया है।

यह उपन्यास केवल रामायण की पुनर्कथा नहीं है, बल्कि प्राग्वैदिक और प्राचीन भारतीय सभ्यताओं, विभिन्न नृवंशों, देवों, दैत्यों, दानवों, नागों तथा आर्य-अनार्य संस्कृतियों के संघर्ष और समन्वय का व्यापक आख्यान है। लेखक ने इतिहास, पुराण, दर्शन और मानवशास्त्र के आधार पर उस युग की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संरचनाओं का पुनर्निर्माण करने का प्रयास किया है।

उपन्यास में रावण को केवल एक खलनायक के रूप में नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शासक, विद्वान, योद्धा और सांस्कृतिक एकता के समर्थक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उसकी "रक्ष-संस्कृति" का स्वप्न समस्त मानव जातियों को एक सूत्र में बाँधने का प्रयास है। इसी विचार से उपन्यास का शीर्षक 'वयं रक्षामः' अर्थात् "हम रक्षा करते हैं" रखा गया है।

आचार्य चतुरसेन ने अपनी अद्वितीय कथा-शैली, गहन शोध और कल्पनाशीलता के माध्यम से रावण, राम, मेघनाद, विभीषण, मंदोदरी तथा अन्य पात्रों को मानवीय धरातल पर प्रस्तुत किया है। परिणामस्वरूप यह कृति केवल एक उपन्यास न रहकर भारतीय मिथकीय परंपरा, इतिहास-बोध और सांस्कृतिक विमर्श का महाकाव्यात्मक दस्तावेज बन जाती है।

'वयं रक्षामः' हिंदी साहित्य की उन दुर्लभ कृतियों में है जो स्थापित मान्यताओं को चुनौती देते हुए पाठक को इतिहास, संस्कृति, धर्म और सत्ता के प्रश्नों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। इसकी रोचक कथा, विराट कल्पना और वैचारिक गहराई इसे हिंदी के सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक उपन्यासों में स्थान दिलाती है। 

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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