WAH SAAL BAYALIS THA

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₹199

₹250 20% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 1970
  • Total page: 212
  • Language: HINDI

"वह साल बयालीस था" वरिष्ठ लेखिका और कवयित्री रश्मि भारद्वाज का एक अत्यंत संवेदनशील, बहुस्तरीय और वैचारिक उपन्यास है, जो 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि में प्रेम, स्वतंत्रता, स्त्री-अस्मिता और सामाजिक परिवर्तन की जटिल कथा बुनता है। यह केवल एक ऐतिहासिक उपन्यास नहीं, बल्कि प्रेम और स्वतंत्रता के अर्थों की पुनर्व्याख्या करने वाली एक विचारोत्तेजक रचना है।

उपन्यास के केंद्र में दो समानांतर प्रेम-कथाएँ चलती हैं। पहली कथा है रूप और रूद्र की, जो 1942 के स्वतंत्रता संग्राम की उथल-पुथल के बीच जन्म लेती है। रूद्र एक क्रांतिकारी युवक है, जिसके लिए व्यक्तिगत प्रेम से अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र की स्वतंत्रता है। दूसरी ओर रूप का प्रेम त्याग, प्रतीक्षा और आत्मिक समर्पण की पराकाष्ठा का प्रतीक बन जाता है।

दूसरी कथा आधुनिक समय की नायिका अनाहिता शर्मा की है, जो एक स्वतंत्र विचारों वाली चित्रकार है। वह प्रेम करती है, लेकिन अपने व्यक्तित्व और आत्मसम्मान का पूर्ण विसर्जन नहीं करती। उसके माध्यम से लेखिका स्त्री की स्वतंत्र पहचान, प्रेम में समानता और पितृसत्तात्मक समाज द्वारा निर्मित स्त्री-छवियों पर गंभीर प्रश्न उठाती हैं।

रश्मि भारद्वाज इस उपन्यास में यह स्थापित करती हैं कि प्रेम केवल समर्पण नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, सम्मान और आत्मबोध का भी नाम है। उपन्यास में राष्ट्रप्रेम, सांप्रदायिक सौहार्द, स्त्री-विमर्श, इतिहास और आधुनिक जीवन की जटिलताओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

लेखिका की भाषा काव्यात्मक, चित्रात्मक और अत्यंत प्रवाहपूर्ण है। पात्र इतने जीवंत हैं कि पाठक उनके सुख-दुःख का सहभागी बन जाता है। यही कारण है कि यह उपन्यास एक ही समय में प्रेमकथा, ऐतिहासिक आख्यान और स्त्री-मुक्ति का दस्तावेज़ बनकर उभरता है।

साहित्यिक दृष्टि से

"वह साल बयालीस था" समकालीन हिंदी साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है, जो इतिहास और वर्तमान के बीच सेतु बनाते हुए यह प्रश्न उठाता है कि क्या प्रेम बिना स्वतंत्रता के संभव है? और क्या स्वतंत्रता बिना प्रेम के पूर्ण हो सकती है? यह कृति पाठक को भीतर तक झकझोरती है और लंबे समय तक स्मृति में बनी रहती है। 

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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