"व्हीलचेयर" वरिष्ठ कथाकार, उपन्यासकार और ग़ज़लकार ज्ञानप्रकाश विवेक का एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक समकालीन सामाजिक उपन्यास है। वर्ष 2023 में प्रकाशित यह कृति आधुनिक महानगरीय जीवन के अकेलेपन, शारीरिक अक्षमता, मानवीय संबंधों के बदलते स्वरूप और मनुष्य की आंतरिक गरिमा की खोज को केंद्र में रखती है। यह उपन्यास पाठक को यह सोचने के लिए विवश करता है कि क्या वास्तव में केवल शरीर ही अपंग होता है, या संवेदनहीन समाज भी किसी अदृश्य व्हीलचेयर पर बैठा हुआ है।
उपन्यास का शीर्षक "व्हीलचेयर" केवल एक चिकित्सकीय उपकरण का संकेत नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की निर्भरता, असुरक्षा, असहायता और आत्मसम्मान का गहरा रूपक बनकर सामने आता है। लेखक दिखाते हैं कि जीवन की किसी दुर्घटना, बीमारी या उम्र के एक पड़ाव पर व्यक्ति अचानक दूसरों पर निर्भर हो सकता है, और तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक होती है।
कथा में ऐसे पात्र उभरते हैं जो बाहरी रूप से सामान्य जीवन जीते दिखाई देते हैं, लेकिन भीतर से अकेलेपन, उपेक्षा और टूटते रिश्तों की पीड़ा से गुजर रहे होते हैं। परिवार, मित्रता, देखभाल और मानवीय संवेदना जैसे प्रश्न उपन्यास के केंद्र में हैं। ज्ञानप्रकाश विवेक बड़ी सूक्ष्मता से यह रेखांकित करते हैं कि बदलती जीवनशैली और उपभोक्तावादी संस्कृति ने मनुष्यों के बीच की आत्मीयता को किस प्रकार प्रभावित किया है।
लेखक की भाषा सहज, आत्मीय और मार्मिक है। वे भावुकता के अतिरेक में नहीं जाते, बल्कि छोटे-छोटे प्रसंगों और संवादों के माध्यम से जीवन के बड़े सत्य सामने लाते हैं। उनकी दृष्टि करुणा से भरी हुई है, लेकिन उसमें यथार्थ की तीक्ष्णता भी मौजूद है।
"व्हीलचेयर" समकालीन हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण उपन्यास है, जो वृद्धावस्था, शारीरिक अक्षमता, मानवीय गरिमा और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है। यह कृति पाठक को यह समझने का अवसर देती है कि मनुष्य की वास्तविक शक्ति उसकी स्वतंत्रता में नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और मानवीयता को बचाए रखने में निहित है।
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