YE AAM RASTA NAHIN

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 162
  • Language: HINDI

"ये आम रास्ता नहीं" चर्चित कथाकार रजनी गुप्त का एक महत्वपूर्ण स्त्री-केंद्रित सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है। वर्ष 2013 में प्रकाशित यह कृति भारतीय राजनीति, सत्ता-संरचना और पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री की भागीदारी के जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रश्नों को केंद्र में रखती है। यह केवल एक महिला की महत्वाकांक्षा की कहानी नहीं, बल्कि उन असंख्य स्त्रियों की कथा है जो अपनी पहचान और अस्तित्व के लिए पुरुष-प्रधान व्यवस्था से संघर्ष करती हैं।

उपन्यास की नायिका मृदु एक प्रतिभाशाली, संवेदनशील और महत्वाकांक्षी स्त्री है। उसके भीतर नेतृत्व की क्षमता और समाज में बदलाव लाने की इच्छा है, लेकिन बचपन से ही उसे यह सिखाया जाता है कि उसकी सीमाएँ क्या हैं। परिवार उसके सपनों को नियंत्रित करता है और विवाह के बाद पति उसे एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के बजाय "उपयोग की वस्तु" के रूप में देखने लगता है।

मृदु जब राजनीति की दुनिया में प्रवेश करती है, तब उसे एहसास होता है कि यह रास्ता वास्तव में "आम" नहीं है। यहाँ सत्ता, समझौते, षड्यंत्र, आर्थिक प्रभाव और पुरुष वर्चस्व का ऐसा तिलिस्म है, जिसे तोड़ना आसान नहीं। स्त्री की प्रतिभा से अधिक उसके शरीर, उसकी आज्ञाकारिता और उसकी "उपयोगिता" का मूल्यांकन किया जाता है। यही कारण है कि उपन्यास का शीर्षक अत्यंत सार्थक प्रतीत होता है—यह रास्ता सबके लिए खुला दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में कुछ विशेष लोगों के लिए सुरक्षित है।

रजनी गुप्त राजनीति में स्त्री की स्थिति पर तीखे प्रश्न उठाती हैं—

  • क्या लोकतंत्र में स्त्रियों को वास्तव में समान अवसर प्राप्त हैं?
  • क्या महत्वाकांक्षा केवल पुरुषों का अधिकार है?
  • क्या सत्ता तक पहुँचने के लिए स्त्री को अपनी गरिमा और आत्मसम्मान से समझौता करना पड़ता है?
  • क्या परिवार और समाज स्त्री के सपनों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं?

लेखिका की भाषा सहज, प्रभावशाली और संवेदनशील है। वे उपदेश नहीं देतीं, बल्कि कथा और पात्रों के माध्यम से पाठक को सोचने के लिए विवश करती हैं। मृदु का संघर्ष केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संघर्ष बन जाता है।

साहित्यिक दृष्टि से

"ये आम रास्ता नहीं" समकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-विमर्श और राजनीति के अंतर्संबंधों पर लिखा गया एक उल्लेखनीय उपन्यास है। यह सत्ता-संरचनाओं की आलोचना करते हुए स्त्री की आकांक्षाओं, आत्मनिर्णय और प्रतिरोध की कथा प्रस्तुत करता है। यह उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो स्त्री-अधिकार, राजनीति और सामाजिक यथार्थ पर आधारित साहित्य पढ़ना पसंद करते हैं।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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